510वें “दिव्य धर्म यज्ञ दिवस” पर जानिए परमेश्वर कबीर जी को 18 लाख साधु संतों को क्यों कराना पड़ा भण्डारा?”
510वें “दिव्य धर्म यज्ञ दिवस” पर जानिए परमेश्वर कबीर जी को 18 लाख साधु संतों को क्यों कराना पड़ा भण्डारा?” विक्रम संवत 1570 (सन् 1513) में परमेश्वर कबीर जी ने काशी (उत्तरप्रदेश, भारत) में 3 दिन का विशाल भंडारा दिया था जिसमें 18 लाख साधु संत आये थे। दरअसल हुआ यह कि शेखतकी जो बादशाह सिकंदर लोदी का धर्मगुरु था वह कबीर परमेश्वर की बढ़ती ख्याति के कारण उनसे ईर्ष्या करने लगा था। काशी के ब्राह्मण तो पहले से ही उनसे खार खाए बैठे थे। कबीर परमेश्वर के सतज्ञान के कारण ब्राह्मणों की हिन्दुओं पर और काजी मौलवियों की मुसलमानों पर पकड़ कमजोर पड़ रही थी। कर्मकांडों से होने वाली उनकी आय लगभग खत्म होने के कगार पर थी। सभी ब्राह्मणों और मुल्ला-काजियों ने शेखतकी के साथ मिलकर षड़यंत्र के तहत एक योजना बनाई कि कबीर परमेश्वर को फँसाया जाए जिससे वे काशी छोड़कर भाग जाएं। उन्होंने ये युक्ति बनाई कि कबीर एक निर्धन व्यक्ति है, इसके नाम से पत्र पूरे भारतवर्ष के साधु संतों को भेजा जाए कि कबीर जुलाहा काशी में तीन दिन का धर्म भोजन-भण्डारा करेंगे। सारे साधु संत आमंत्रित हैं। साथ में अपने सर्व शिष...